
Odisha ओडिशा: मयूरभंज जिले में बैसिंगा पुलिस ने मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश करते हुए एक बेसहारा बुजुर्ग व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया। परिवार या रिश्तेदारों के आगे न आने और गांव में अंतिम संस्कार को लेकर आपत्ति जताए जाने के बाद पुलिस ने खुद आगे बढ़कर यह जिम्मेदारी निभाई। इस घटना की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।
मृतक की पहचान पीतांबर सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बालासोर जिले के हल्दीपदा इलाके के रहने वाले थे। उनकी पत्नी यशोदा सिंह के साथ वे पिछले लगभग सात वर्षों से बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे थे। उम्र और बीमारी के कारण दोनों दंपति किसी प्रकार की स्थायी आय नहीं कमा पा रहे थे और मयूरभंज के बैसिंगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पुरूनापानी गांव और आसपास के इलाकों में भीख मांगकर अपना जीवन बिता रहे थे।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, यह दंपति अक्सर दिन भर गांवों में भीख मांगते और रात में पेड़ों के नीचे या सरकारी इमारतों के बरामदों में सो जाते थे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका जीवन किसी तरह चल रहा था।
दो दिन पहले पीतांबर सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज शुरू किया, लेकिन मंगलवार को उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मृत्यु के बाद उनके शव को शाम के समय पुरूनापानी गांव लाया गया। लेकिन यहां स्थिति और भी जटिल हो गई क्योंकि गांव के कुछ लोगों ने श्मशान घाट में उनके अंतिम संस्कार को लेकर आपत्ति जताई। इस कारण शव के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अटक गई।
इसके अलावा, मृतक के परिवार या किसी भी रिश्तेदार ने आगे आकर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी नहीं ली। लंबे समय तक इंतजार के बावजूद जब कोई भी सामने नहीं आया, तो स्थिति असहज हो गई और शव वहीं रखा रहा।
ऐसे हालात में बैसिंगा पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आगे कदम बढ़ाया। पुलिस ने ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन से बातचीत कर स्थिति को संभाला और अंततः स्वयं अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।
पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में सभी आवश्यक धार्मिक और सामाजिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने मानवता का परिचय देते हुए पूरी प्रक्रिया को सम्मानपूर्वक संपन्न कराया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिस का यह कदम समाज के लिए एक प्रेरणा है, क्योंकि जब कोई परिजन आगे नहीं आया और समाज में भी विरोध की स्थिति बनी, तब पुलिस ने जिम्मेदारी निभाते हुए अंतिम संस्कार सुनिश्चित किया।
इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेसहारा और असहाय लोगों की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। पीतांबर सिंह और उनकी पत्नी का जीवन कठिनाइयों से भरा रहा, जहां बुढ़ापे में भी उन्हें भीख मांगकर जीवन चलाना पड़ा।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह मामला केवल कानून व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी है, और ऐसे मामलों में समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ हो।
इस घटना के बाद इलाके में लोगों के बीच चर्चा है कि बेसहारा और वृद्ध लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सहायता व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि किसी भी व्यक्ति को जीवन के अंतिम पड़ाव में इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े।
कुल मिलाकर, मयूरभंज जिले की यह घटना एक तरफ सामाजिक उपेक्षा की तस्वीर दिखाती है, तो दूसरी तरफ बैसिंगा पुलिस की संवेदनशीलता और मानवता को भी सामने लाती है, जिसने एक बेसहारा बुजुर्ग को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दिलाई।





